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माता कंसमर्दिनी का प्राचीन मंदिर Historical temple of Mata kansmardhini - Uttarakhand HuB

कृष्ण लीला से जुडा वह अहम् मंदिर जो गढ़वाल के श्रीनगर में बसा है मान्यता है की कंसमर्दिनी का मंदिर

माता कंसमर्दिनी

  मान्यता है की कंस का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने जब कृष्ण अवतार लेना चाहा तब कंस ने मृत्यु के भय से नारायण के अवतार स्वरुप कृष्ण का वध जन्म के तुरंत बाद करना चाहा और उसने जब शिशु को जोर से जब धरती पर पटका तब वहाँ देवी प्रकट हुई और हँसते हुए कंस से कहने लगी ऐ ! मुर्ख तू मेरा क्या अंत करेगा तेरा अंत तो वृदावन पहुँच चूका है , इतना कह कर देवी अंतर्ध्यान हो गयी |
    अतः भक्तो जिसे कंस ने विष्णु का अवतार समझ कर मारने की कोशिश की वह कोई और नही माता कंस मर्दिनी ही थी जब कंस ने माता के शिशु रूपी शरीर को धरती पर जोर से पटका तब उनका शरीर इसी स्थान पर गिरा और तभी से इस स्थान का नाम कंस मर्दिनी पडा |

मंदिर में माँ का स्वरुप

    मंदिर में माँ की मूर्ति काले-भूरे रंग की है और देखने से यह प्रतीत होता है जैसे कोई शिशु लेटा हुआ हो और इससे हमे यह यकीन भी हो गया की मंदिर से जुडी मान्यता पर कोई शक नही है |

कंसमर्दिनी मंदिर स्थान का पता 

   अलकनंदा विहार, श्रीनगर गढ़वाल उत्तराखण्ड पिन 246471 
   Alaknanda vihar, Srinagar Garhwal Uttrakhand Pin 246471

कृष्ण जन्म से जुडी कथा

   नारायण अवतार के दो मुख्य पात्र हैं कृष्ण और कंस ,कंस अधर्मी राजा था जिसने धरती पर अत्याचार की सभी सीमाए लाँघ दी थी साथ ही वह नास्तिक भी था जिस कारण उसने अपने काल में पूजा पर पूरी तरह रोक लगा दी थी ऋषि-मुनियों,पुजारियों की हत्या आम-सी बात थी यज्ञ स्थलों पर गौ मांस डाला जाता जिससे यज्ञ स्थलों पर पूजन पूरी तरह बाधित हो जाए आम जनता पर लगान कई गुना बढ़ा दिया गया जीना दुश्वार हो चूका था |
          जिससे सभी इतनी अधिक नफरत करते थे वह कंस भी किसी से बहुत अधिक प्रेम करता था वह थी कंस की बहन कंस ने अपनी बहन देवकी का ब्याह निकट देश के राजा से कराया जब कंस अपनी प्रिय बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा था
        तभी आकाश वाणी हुई हे! कंस जिस बहन का ब्याह तू करा रहा है उसी देवकी की आठवी संतान तेरा वध करेगी |
    यह सुनते ही कंस कुछ समझ नही पाया और सोचने लगा तभी कंस के मस्तिष्क में आया क्यों ना जड़ को ही नष्ट कर दिया जाय जिससे ना मेरा काल जन्मेगा और ना ही मुझे कोई मार पायेगा की तभी कंस ने अपनी तलवार निकाली और मारने के लिए आगे बढ़ा |
            तभी कंस के जीजा ने कहा हे! महाबली तुम सा पराक्रमी कौन है यदि तुमने स्त्री का वध अपनी तलवार से किया तब इस पाप को कभी ना हटाया जा सकेगा लोग आपको कैसे वीर , महाबलशाली,पराक्रमी कहेंगे और काल तो पुत्र है आपकी बहन नही में आपको अपने सभी पुत्र जन्म लेते ही दे दिया करूंगा जिससे आपका काल कभी बढ़ ही नही पायेगा और आपका उनका अंत कर देना यह सुनकर कंस रुक गया और दोनों को कारावास में डाल दिया |
   फिर वह घडी भी आई जब देवकी और वाशुदेव  के पहले पुत्र ने जन्म लिया और कंस के जीजा उसे लेकर चल पड़े कंस को सोपने पर यह देखकर कंस की दया जाग उठी और उसने कहा अंत मेरा आठवां पुत्र है तो फिर अन्य को क्यु मृत्यु दूँ और उसने उस पुत्र को मरने से मना कर दिया |
                  परन्तु यदि कंस इसी प्रकार पुत्रो को छोड़ देता अंत न करता पाप धरती पर न बढ़ता तो प्रभु का अवतार कैसे होता ?इसी वजह से नारद मुनि कंस के पास चले आये और कंस को भ्रमित करने लगे – हे ! कंस आप यह क्या कर रहें हैं और कंस को आगे से गिनकर ,पीछे से, बीच से गिन कर इतना भ्रमित कर दिया की कंस सोचने लगा आठवां पुत्र कौन-सा होगा इसके बाद क्या था कंस चल पड़ा कारागार की तरफ और जिसे थोड़ी देर पहले जीवन दान दिया था उसी का अंत कर दिया ,यह क्रम चलता रहा कंस हर पुत्र को जमीन पर पटक कर मार डालता ,यह देख धरती माँ से भी रहा न गया और धरती माँ भगवान शिव के पास गाय का रूप धारण कर चल दी और कहने ली हे प्रभु अब मुझसे यह सब नही देखा जाता और आप इस पाप को रोकिये जिसे सुन प्रभु ने कहा जल्द ही इस पाप का अंत हो जाएगा |
          और आखिर वह घडी भी आ गयी जब प्रभु विष्णु कृष्ण अवतार लेने वाले थे
और यहीं से कंस के पापो का अंत हुआ और प्रभु विष्णु ने कृष्णा अवतार लिया उस दिन तेज़ बारिश बादल गर्जन जैसे चरम पर थे तब प्रभु विष्णु ने अवतार लिया और तब सभी द्वारपाल सो गये ताले खुल गये और आकाश वाणी हुई वाशुदेव तुम इसे नन्द के घर छोड़ आओ और नन्द की पुत्री को यहाँ ले आओ ,नन्द के घर वाशुदेव अपने पुत्र को छोड़ आये और उनकी पुत्री ले आये |
            बाद में जब जन्म की खबर  कंस तक पहुची तो कंस तिलमिला उठा वह जल्दी से कारागार पहुँच बालक का अंत करने को बेताब हुआ जा रहा रहा था और कंस कारागार में पहुंच जैसे ही नवजात बालिका को जमीन पर पटका वैसे ही आदिशक्ति ने कंस को हस्ते हुए कहा मुर्ख कंस तू मेरा क्या अंत करेगा तेरा काल तो ब्रीज भी पहुच चूका है तेरा अंत तो निश्चित है इतना कह कर आदिशक्ति अंतर्ध्यान हो गयी |
        कंस ने जब आठवीं पुत्री को जमीन पर पटका था तब उस पुत्री का अंश इस मंदिर के मूर्ति वाली स्थान पर आकर गिरा था जिस वजह से इस मंदिर का नाम कंसमर्दिनी पड़ा  |

उम्मीद है दोस्तों आपको पूरी मंदिर से जुडी सारी खानी समझ आ गयी होगी (धन्यवाद)

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